Chapter 6

दया कर दान भक्ति का

Daya Kar Daan Bhakti Ka

दया कर दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।

दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना।

हमारं ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ।

अंधेरे दिल में आकर के, परम ज्योति जगा देना।

बहा दो प्रेम की गंगा, दिलों में प्रेम का सागर ।

हमें आपस में मिल जुल कर प्रभु रहना सिखा देना।

हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा।

सदा ईमान हो सेवा, व सेवक चर बना देना।

वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना।

वतन पर जां फिदा करना, प्रभु हमको सिखा देना।

दया कर दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना

दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना।

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