Chapter 4

सरस्वती वंदना

Saraswati Vandana

सुखद सुहासिनी, सुमधुर भाषनी - 2

सिद्धि रूप वरदानी.....

नाद रूप हे, दिव्य दर्शिनी - 2

मोहे मुनि जन ज्ञानी

वीणा वादिनी, परम सुहावनी

बस हे सदा मम वाणी

हंस विराजिनी, सब गुण साजिनी

धवल रूप कल्याणी

शत्-शत् बार प्रणाम शारदे

जय जय जय कल्याणी

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