Chapter 8

वर दे, वीणावादिनी वर दे

Var De Veena Vadini Var De

वर दे, वीणावादिनी वर दे!

प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव

भारत में भर दे!

वर दे, वीणावादिनी वर दे।

काट अंध-उर के बंधन-स्तर

बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर

कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर

जगमग जग कर दे!

वर दे, वीणावादिनी वर दे।

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव

नवल कंठ, नव जलद-मंद रव;

नव नभ के नव विहग-वृंद को

नव पर, नव स्वर दे!

वर दे, वीणावादिनी वर दे।

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